उपयोग से लाभ :
– तांबा प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट चयापचय तथा संरचनात्मक समर्थन के लिए आवश्यक एंजाइमों को सक्रिय करता है।
– यह प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में इलेक्ट्रॉन परिवहन के लिए आवश्यक है तथा लौह (आयरन) के अवशोषण और उपयोग में सहायता करता है।
– यह पराग के निर्माण और उसकी जीवितता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे सफल निषेचन सुनिश्चित होता है।
– यह नाइट्रेट के अवशोषण, परिवहन और उसे उपयोगी जैविक नाइट्रोजन में परिवर्तित करने में मदद करता है।
– यह पौधों को ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में सहायता करता है।
– तांबा की कमी के लक्षण: पौथों की वृद्धि रुक जाती है, नई पत्तियाँ पीली या हल्के रंग की हो जाती हैं, मुड़ सकती हैं और मर भी सकती हैं। (नेक्रोसिस), फूल कम लगते हैं।
मात्रा: छिडकांक: १ से २ ग्राम प्रति लिटर पानी।
ड्रिप (टपक) सिंचनः २५० ग्राम बहार कॉपर ईंडीटीए प्रति एकड क्षेत्र हेतु इस्तेमाल करें। ड्रोन द्वारा छिडकांक २ से ४ ग्राम प्रति लिटर पानी।
जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट जिंक 33% आमतौर पर जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट को संदर्भित करता है जो एक सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट) उर्वरक है। इसका उपयोग पौधों में जिंक की कमी को दूर करने के लिए किया जाता है। यह पौधों के विकास में बेहद महत्वपूर्ण है और एंजाइम सक्रियण, प्रोटीन संश्लेषण तथा हार्मोन उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
जिंक २१% (जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट) एक उर्वरक है जिसमें २१% जिंक और १०% सल्फर होता है। इसे पौथों में जिंक की कमी दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो एंजाइम, प्रोटीन और ऑक्सिन जैसे हार्मोन के निर्माण में सहायता करके पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह उत्पाद कई प्रकार की फसलों के लिए प्रभावी है और पैदावार, फलों की गुणवत्ता तथा पौधों की ठंड सहनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है।
ग्रोफॉस यह सूक्ष्म अन्नतत्व युक्त तरल खाद है, जिसमें सरकारी मान्यतानुसार प्रमाणित अनुपात में सूक्ष्म पोषक तत्वों का समायोजन किया गया है। इसका उपयोग फसल की तेज एवं शक्तीशाली वृद्धी हेतु किया जाता है। इसमें निहित सूक्ष्म पोषक तत्व प्रमुख अन्नतत्वों की कार्क्षमता बढाने के साथ साथ पत्तों पर लगने वाली विविध बिमारीयों से फसल को सुरक्षित रखते हैं।
फेरॉन-एस: एक संपूर्ण खाद अनेक कारणों से जमीन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का प्रमाण कम हो जाता है जिसके फलस्वरुप जमीन की उर्वरा क्षमतापर विपरित असर होता है। रासायनिक खाद के जरिये नायट्रोजन, सुपर फॉस्फेट या पोटाश की आपूर्ती हो सकती है। वास्तव में किसी भी पेड-पौधे या फसल की वृद्धी में १६ प्रकार के मूलद्रव्यों की आवश्यकता होती है। इसलिये जमीन को रासायनिक तथा गोबर खाद के साथ लौह, गंथक, मँगेनीज, कॉपर, बोरेक्स एवं मॉलिब्डेनम जैसे बहुमूल्य अन्नतत्वों की आवश्यकता होती है। इन सभी तत्वों से परिपूर्ण है, फेरॉन-एस जो फसल की वृद्धी में सहकार्य करता है।
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