बोरॉन 20% यह बोरॉन सूक्ष्म पोषक तत्व खाद है, जिसमें 20% बोरॉन घुलनशील स्वरूप में पाया जाता है। यह विशेष रूप से विभिन्न फसलों में बोरॉन की कमी को रोकने और सुधारने के लिए उपयोग किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ एवं उपयोग से लाभः
– यह फूल विगलन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
– इसके उपयोग से फसल का स्वाद, आकार, रंग और उत्पादन बढ़ता है।
– यह पौधों की जड़ों की वृद्धि (रूट एलॉन्गेशन) बढ़ाने में, तथा वृद्धि हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
– यह फूल निर्मिती की प्रक्रिया और फल सेटिंग को बढ़ाता है।
– यह दानों को भरने (ग्रेन फिलिंग), फलों में शर्करा मात्रा तथा फलों के आकार को बेहतर बनाता है।
– यह पत्तियों में रंग (पिग्मेंटेशन) और पानी धारण क्षमता को बढ़ाता है।
फसलेंः सभी फल और सब्जी वाली फसलें।
प्रयोग विधिः पहला छिड़कावः फूलधारणा से ठीक पहले।
दूसरा छिड़कावः पहले छिड़काव के १०-१२ दिन पश्चात।
टिप्पणी: फसल अवधि के दौरान दो बारछिड़काव बोरॉन की आवश्यकता को पूरा करने हेतु पर्याप्त है।
मात्रा: छिडकांव: १.० से १.५ ग्राम प्रति लिटर पानी।
ड्रोन द्वारा छिडकांव: २.० से ३.० ग्राम प्रति लिटर पानी।
फेरॉन-एस: एक संपूर्ण खाद अनेक कारणों से जमीन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का प्रमाण कम हो जाता है जिसके फलस्वरुप जमीन की उर्वरा क्षमतापर विपरित असर होता है। रासायनिक खाद के जरिये नायट्रोजन, सुपर फॉस्फेट या पोटाश की आपूर्ती हो सकती है। वास्तव में किसी भी पेड-पौधे या फसल की वृद्धी में १६ प्रकार के मूलद्रव्यों की आवश्यकता होती है। इसलिये जमीन को रासायनिक तथा गोबर खाद के साथ लौह, गंथक, मँगेनीज, कॉपर, बोरेक्स एवं मॉलिब्डेनम जैसे बहुमूल्य अन्नतत्वों की आवश्यकता होती है। इन सभी तत्वों से परिपूर्ण है, फेरॉन-एस जो फसल की वृद्धी में सहकार्य करता है।
जिंक २१% (जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट) एक उर्वरक है जिसमें २१% जिंक और १०% सल्फर होता है। इसे पौथों में जिंक की कमी दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो एंजाइम, प्रोटीन और ऑक्सिन जैसे हार्मोन के निर्माण में सहायता करके पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह उत्पाद कई प्रकार की फसलों के लिए प्रभावी है और पैदावार, फलों की गुणवत्ता तथा पौधों की ठंड सहनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है।
न्यूट्राई जिंक एक संपूर्ण खाद अनेक कारणों से जमीन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का प्रमाण कम हो जाता है। जिसके फलस्वरुप जमीन की उर्वरा क्षमतापर विपरित असर होता है। रासायनिक खाद के जरिये नायट्रोजन, सुपर फॉस्फेट या पोटाश की आपूर्ती हो सकती है। वास्तव में किसी भी पेड-पौथे या फसल की वृद्धी में १६ प्रकार के मूलद्रव्यों की आवश्यकता होती है। इसलिये जमीन की रासायनिक तथा गोबर खाद के साथ लौह, गंधक, मैंगनीज, कॉपर, बोरेक्स एवं मौलिब्डेनम जजैसे बहुमूल्य अजतत्वों की आवश्यकता होती है। इन सभी तत्वों से परिपूर्ण है, फेरौन-एस जओ फसल की वृद्धी में सहकार्य करता है।
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