जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट जिंक 33% आमतौर पर जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट को संदर्भित करता है जो एक सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट) उर्वरक है। इसका उपयोग पौधों में जिंक की कमी को दूर करने के लिए किया जाता है। यह पौधों के विकास में बेहद महत्वपूर्ण है और एंजाइम सक्रियण, प्रोटीन संश्लेषण तथा हार्मोन उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
जिंक की कमी को दूर करता है: पौधों का रुक-रुक कर बढ़ना, पत्तियों की नसों के बीच पीला पड़ना (इंटखेनल क्लोरोसिस), तथा उत्पादन में कमी जैसे लक्षणों को रोकता है।
पौध स्वास्थ्य को बढ़ाता है: क्लोरोफिल निर्माण, प्रकाश संश्लेषण और समग्र चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बेहतर बनाता है। उपज वृद्धीः फल विकास में सुधार, बेहतर उपज और उच्च गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त करने में सहायता करता है।
सुधारित प्रतिरोध क्षमताः ठंड और सूखे जैसी परिस्थितियों के प्रति पौधों को अधिक सक्षम बनाता है।
मात्रा: मृदा उपचार (सोइल ट्रेंच): ४ से ५ किलो किसी अन्य खाद के साथ मिलाकर उपयोग करें।
झिंक की कमी को पूरा करनेवाला उत्पाद भारत में बहुतांश जमिनों में जिंक की कमी पाई जाती है। किसी भी फसल या पौधे के शक्तिशाली विकास हेतु जिंक महत्वपूर्ण अन्नतत्व है। ट्राई जिंक ई.डी.टी.ए. यह चिलेटेड पाउडर स्वरुप उत्पाद है जिसमें १२% जिंक होता है जो पूर्णतः चिलेट स्वरुप में है। यह पानी में तुरंत घुलनशील होकर पौधों को उपलब्ध होता है।
जिंक २१% (जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट) एक उर्वरक है जिसमें २१% जिंक और १०% सल्फर होता है। इसे पौथों में जिंक की कमी दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो एंजाइम, प्रोटीन और ऑक्सिन जैसे हार्मोन के निर्माण में सहायता करके पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह उत्पाद कई प्रकार की फसलों के लिए प्रभावी है और पैदावार, फलों की गुणवत्ता तथा पौधों की ठंड सहनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है।
मँगेनीज सल्फेट उर्वरक स्प्रे मँग यह जल में घुलनशील उर्वरक है, जिसे विभिन्न फसलों में मैंगनीज़ की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। यह प्रकाश संश्लेषण, एंजाइम सक्रियण और पौधों की तनाव सहनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फसल की उपज में सुधार करता है।
न्यूट्राई जिंक एक संपूर्ण खाद अनेक कारणों से जमीन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का प्रमाण कम हो जाता है। जिसके फलस्वरूप जमीन की उर्वरा क्षमतापर विपरित असर होता है। रासायनिक खाद के जरिये नायट्रोजन, सुपर फॉस्फेट या पोटाश की आपूर्ती हो सकती है। वास्तव में किसी भी पेड-पौधे या फसल की वृद्धी में १६ प्रकार के मूलद्रव्यों की आवश्यकता होती है। इसलिये जमीन को रासायनिक तथा गोबर खाद के साथ लौह, गंथक, मैगनीज, कॉपर बोरेक्स एवं मॉलिब्डेनम जैसे बहुमूल्य अनतत्वों की आवश्यकता होती है। इन सभी तत्वों से परिपूर्ण है, फेरॉन-एस जो फसल की वृद्धी में सहकार्य करता है।
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