उपयोग से लाभ :
– यह जल अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन मुक्त करने और ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए आवश्यक है।
– यह श्वसन, नाइट्रोजन अवशोषण, कार्बोहाइड्रेट निर्माण और ऊर्जा स्थानांतरण से जुड़े कई एंजाइमों को सक्रिय करता है।
– यह लिग्गिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है, जो कोशिका भित्ति को संरचनात्मक मजबूती और कठोरता प्रदान करता है।
– यह कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करने में मदद करता है तथा पौथों में नाइट्रेट के अपचयन में सहायक होता है।
– यह परागण, जड़ कोशिकाओं के बढ़ाव तथा समग्र कोशिका वृद्धि और विभाजन को बढ़ावा देता है।
– यह प्रतिरक्षा यौगिकों के निर्माण में सहायक है और मिट्टी में मौजूद रोगजनकों व कीटों के विरुद्ध पौधों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
मैंगनीज की कमी के लक्षण: इसकी कमी सबसे पहले नई पत्तियों पर दिखाई देती है, जिसमें नसें हरी रहती हैं लेकिन पत्तियाँ पीली (क्लोरोसिस) हो जाती हैं, साथ ही भूरे धब्बे और मुड़े हुए किनारे दिखाई देते हैं।
मात्रा: छिडकांव: १ से २ ग्राम प्रति लिटर पानी।
ड्रिप (टपक) सिंचनः २५० ग्राम बहार मँगेनीज ईडीटीए प्रति एकड क्षेत्र हेतु इस्तेमाल करें।
ड्रोन द्वारा छिडकांक: २ से ४ ग्राम प्रति लिटर पानी।
न्यूट्राई जिंक एक संपूर्ण खाद अनेक कारणों से जमीन में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का प्रमाण कम हो जाता है। जिसके फलस्वरूप जमीन की उर्वरा क्षमतापर विपरित असर होता है। रासायनिक खाद के जरिये नायट्रोजन, सुपर फॉस्फेट या पोटाश की आपूर्ती हो सकती है। वास्तव में किसी भी पेड-पौधे या फसल की वृद्धी में १६ प्रकार के मूलद्रव्यों की आवश्यकता होती है। इसलिये जमीन को रासायनिक तथा गोबर खाद के साथ लौह, गंथक, मैगनीज, कॉपर बोरेक्स एवं मॉलिब्डेनम जैसे बहुमूल्य अनतत्वों की आवश्यकता होती है। इन सभी तत्वों से परिपूर्ण है, फेरॉन-एस जो फसल की वृद्धी में सहकार्य करता है।
मँगेनीज सल्फेट उर्वरक स्प्रे मँग यह जल में घुलनशील उर्वरक है, जिसे विभिन्न फसलों में मैंगनीज़ की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। यह प्रकाश संश्लेषण, एंजाइम सक्रियण और पौधों की तनाव सहनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फसल की उपज में सुधार करता है।
जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट जिंक 33% आमतौर पर जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट को संदर्भित करता है जो एक सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट) उर्वरक है। इसका उपयोग पौधों में जिंक की कमी को दूर करने के लिए किया जाता है। यह पौधों के विकास में बेहद महत्वपूर्ण है और एंजाइम सक्रियण, प्रोटीन संश्लेषण तथा हार्मोन उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
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